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Maharana Pratap Life History

December 27, 2012 | | , , | 1 Comment so far
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Maharana Pratap

Maharana Pratap Life History

स्वत्रंत्रता प्रेमी मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप का जन्म ज्येष्ठा सुदी त्रयोदशी, 31 मई 1539 को सिसोदिया वंश में हुआ था | महाराणा प्रताप के माता पिता मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह जी तथा जयंता देवी थे | 28 फरवरी 1572 को महाराणा प्रताप का राज तिलक हुआ था |

"अवर नृप पतशाह अगै, ह़ोय भृत जोडे हाथ,
नाथ उदेपुर न नम्यो , नम्यो न अर्बुद नाथ।"

महाराणा प्रताप के राज तिलक के दौरान, सभी राजा उनकी सेवा में हाथ जोड़ कर खड़े थे | लेकिन केवल दो राजा, उदयपुर के राणा प्रताप और अबुर्द प्रदेश सिरोही के महाराव सुरतान सिंह ने हाथ नहीं जोड़े |
राजा महाराणा प्रताप सिंह और महाराव सुरतान दोनों ऐसे शासक थे जिन्होंने अपने प्रदेश कि रक्षा के लिए सारे राज शाही ठाट बाट छोड़ दिए थे | और वे दोनों पहाड़ी क्षेत्र और गुफाओं में अपना जीवन व्यतीत करते थे |

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महाराव सुरतान सिंह ने सिरोही क्षेत्र पर 5 साल तक राज किया | लेकिन 5 साल बाद अकबर ने सिरोही पर हमला करने कि लिए सेना भेजी | महाराव युद्ध हार गए | लेकिन उन्होंने गुलामी स्वीकार नहीं की | वे माउंट आबू चले गए | वहा से मौका पाकर उन्होंने मुग़ल सेना पर कई बार हमला किया | कई बार सिरोही क्षेत्र उनके कब्जे में आया लेकिन पुनः मुग़ल हमला करके उसे अपने कब्जे में ले लेते थे | आखिरकार उन्होंने अपनी सेना को इकट्टा करके पुनः मुग़ल सेना पर हमला किया | और उन्होंने मुग़ल सेना के अधिकारी सईद हाकिम को मार दिया और उन्होंने सिरोही पर पुनः कब्ज़ा कर लिया |
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Haldighati War
हल्दी घाटी युद्ध महाराणा प्रताप और मुग़ल सेना के बीच लड़ा गया था | 18 अक्टूबर 1583 को राव सुरतान सिंह माउंट आबू से निचे आये, और एक प्रसिद्ध जगह दत्तनयी पर उन्होंने मुग़ल सेना पर हमला कर दिया | इस तरह राव सुरतान सिंह ने मुग़लो से लड़ने में महाराणा प्रताप की मदद की |

असल में, महाराव सुरतान सिंह पिंडवाड़ा, वसन्तगढ, आबू की पहाड़ियों में अपनी सेना को बढ़ाने के लिए भील और गरासिया जन जाती की मदद ले रहे थे | महाराव पिंडवाड़ा की पहाड़ियों में गोगुन्दा घाटी में मुग़लो पर लगातार गोरिल्ला पद्द्ति से हमला कर रहे थे | क्योकि मुग़ल गोगुन्दा घाटी के रास्तें मेवाड़ पर हमला करने जा रहे थे |

महाराणा प्रताप का सामना मुग़ल शाशक अकबर से हल्दी घाटी में हुआ | तब महाराव सुरतान सिंह देवड़ा ने अकबर की सेना को दतरनी युद्ध के मैदान से भगा दिया |

महाराणा प्रताप मुग़लों के साथ आजीवन युद्ध करते रहे लेकिन उनकी गुलामी स्वीकार नहीं की | इसी तरह अपनी 51 साल के जीवन में महाराव सुरतान सिंह ने 52 युद्ध लाडे |

"इक्यावन बरस जीवियो बनाढ , जीतो निज बावन महाराड़ "
1 Comments
  1. shankar singh rajputJuly 25, 2016

    Born: May 9, 1540, Kumbhalgarh...edit it...

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